Breaking

Thursday, January 10, 2019

12 वर्ष पश्चात क्यों आता है कुम्भ का मेला, अभी जानिए


पौराणिक कथाओं के अनुसार देवता और राक्षसों के सहयोग से समुद्र मंथन के पश्चात् अमृत कलश की प्राप्ति हुई| जिस पर अधिकार जमाने को लेकर देवताओं और असुरों के बीच युद्ध हुआ| इस युद्ध के दौरान अमृत कलश से अमृत की कुछ बूंदे निकलकर पृथ्वी के चार स्थानों पर गिरी|
वह 4 स्थान जहां मनाया जाता है कुम्भ मेला

प्रयाग, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में कुम्भ मनाया जाता है, जिनमें प्रयाग गंगा-यमुना-सरस्वती के संगम पर और हरिद्वार गंगा नदी के किनारे हैं, वहीं उज्जैन शिप्रा नदी और नासिक गोदावरी नदी के तट पर बसा हुआ है|
12 वर्ष पश्चात क्यों आता है कुम्भ का मेला


अमृत पर अधिकार को लेकर देवता और दानवों के बीच लगातार बारह दिन तक युद्ध हुआ था| जो मनुष्यों के बारह वर्ष के समान हैं| अतएवं कुम्भ भी बारह होते हैं, उनमें से चार कुम्भ पृथ्वी पर होते हैं और आठ कुम्भ देवलोक में होते हैं| युद्ध के दौरान सूर्य, चंद्र और शनि आदि देवताओं ने कलश की रक्षा की थी, अतः उस समय की वर्तमान राशियों पर रक्षा करने वाले चंद्र-सूर्यादिक ग्रह जब आते हैं, तब कुम्भ का योग होता है और चारों पवित्र स्थलों पर प्रत्येक तीन वर्ष के अंतराल पर क्रमानुसार कुम्भ मेले का आयोजन किया जाता है|

No comments:

Post a Comment